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    दृष्टि और लक्ष्य

    यू.टी. चंडीगढ़ की राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) की दृष्टि यह है कि न्याय धन, लिंग या सामाजिक स्थिति के आधार पर सीमित न हो। यह दृष्टि संविधान के अनुच्छेद 39A और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 में निहित है। इसका लक्ष्य सभी के लिए न्याय तक समान पहुँच सुनिश्चित करना है, ताकि चंडीगढ़ का कोई भी निवासी गरीबी, असुरक्षा या वंचित स्थिति के कारण विधिक सहायता से वंचित न रहे।

    संस्थागत ढाँचे (उच्च न्यायालय का संरक्षण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, स्थायी लोक अदालत, मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र) से लेकर क्रियात्मक साधनों (फ्रंट ऑफिस, पैनल अधिवक्ता, पैरा-लीगल वॉलंटियर्स, जन-जागरूकता अभियान) तक, एसएलएसए चंडीगढ़ न्याय को सुलभ, किफायती और समावेशी बनाने के लिए कार्य करता है।


    यू.टी. चंडीगढ़ का एसएलएसए मिशन किसी कठोर सूची के रूप में व्यक्त नहीं है, बल्कि इसकी मुख्य गतिविधियों और कार्यक्रमों में स्पष्ट दिखाई देता है:

    निःशुल्क विधिक सेवाएँ

    • सिविल, आपराधिक, राजस्व, श्रम, सेवा और प्रशासनिक मामलों में पैनल अधिवक्ताओं के माध्यम से निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता प्रदान करता है।
    • सेवाओं में न्यायालय शुल्क का भुगतान, याचिकाओं का मसौदा, अनुवाद, विधिक प्रतिनिधित्व, गवाहों का खर्च एवं सत्यापित प्रतियाँ सम्मिलित हैं।
    • पात्र श्रेणियाँ: अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय, महिलाएँ, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, मानव तस्करी के शिकार, प्राकृतिक या औद्योगिक आपदा पीड़ित, हिरासत में व्यक्ति तथा वे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय निर्धारित सीमा (वर्तमान में ₹3 लाख) के भीतर है।

    वैकल्पिक विवाद निपटारा (एडीआर) – लोक अदालतें एवं मध्यस्थता

    • राष्ट्रीय लोक अदालत, जेल लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएँ) का आयोजन कर त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण विवाद निपटारा सुनिश्चित करता है।
    • जिला न्यायालय परिसर, सेक्टर-43 में स्थित मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र संचालित करता है, जहाँ प्रशिक्षित मध्यस्थ विवादों का स्वैच्छिक निपटारा कराते हैं।
    • लोक अदालत के निर्णय बाध्यकारी, प्रवर्तनीय और अंतिम होते हैं—जिससे लंबित मामलों, देरी और मुकदमेबाजी की लागत में कमी आती है।

    विधिक साक्षरता एवं जागरूकता

    • चंडीगढ़ के विद्यालयों, महाविद्यालयों, गाँवों, कॉलोनियों और कल्याण संस्थानों में विधिक जागरूकता शिविर, संगोष्ठी एवं कार्यशालाएँ आयोजित करता है।
    • विशेष ध्यान: महिलाओं, बच्चों, कमजोर वर्गों, प्रवासी श्रमिकों, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के अधिकारों पर।
    • निःशुल्क विधिक सहायता, पीड़ित मुआवज़ा और विधिक अधिकारों की जानकारी के लिए मीडिया अभियान, प्रकाशन और सामाजिक मंचों का उपयोग करता है।

    पीड़ित मुआवज़ा

    • यू.टी. चंडीगढ़ पीड़ित मुआवज़ा योजना लागू करता है, ताकि अपराध के पीड़ित—विशेषकर महिलाएँ, बच्चे और कमजोर वर्ग—पुनर्वास हेतु समय पर वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकें।
    • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ मिलकर मुआवज़े की प्रक्रिया और वितरण सुनिश्चित करता है।

    क्षमता निर्माण एवं संस्थागत सहयोग

    • अधिवक्ताओं, पैरा-लीगल वॉलंटियर्स एवं मध्यस्थों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है, जिससे विधिक सेवाएँ अधिक संवेदनशील और सक्षम हों।
    • एडीआर भवनों और जिला न्यायालयों में फ्रंट ऑफिस बनाए रखता है, जहाँ लोग सीधे विधिक सलाह ले सकते हैं।
    • 24×7 निःशुल्क विधिक सलाह हेल्पलाइन (1516) और मोबाइल हेल्पलाइन (+91-7087-112-348) संचालित करता है।

    क्यों महत्वपूर्ण है एसएलएसए चंडीगढ़ की दृष्टि एवं मिशन

    • संवैधानिक प्रावधान का पालन: अनुच्छेद 39A के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करता है।
    • न्याय तक पहुँच का सेतु: हाशिए पर पड़े व्यक्तियों तक पहुँचता है जिन्हें प्रतिनिधित्व, जागरूकता या उपचार नहीं मिल पाता।
    • जागरूकता से सशक्तिकरण: विधिक साक्षरता आत्मविश्वास बढ़ाती है, शोषण घटाती है और न्याय सुनिश्चित करती है।
    • वैकल्पिक विवाद निपटारा द्वारा राहत: मध्यस्थता और लोक अदालतें लंबित मामलों को कम करती हैं और बाध्यकारी, किफायती समाधान देती हैं।
    • पीड़ित सहायता एवं पुनर्वास: समर्पित मुआवज़ा योजना कमजोर वर्गों की सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करती है।
    • संस्थागत स्थिरता: प्रशिक्षण, निगरानी और प्रशासनिक ढाँचे से विधिक सहायता की गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित होती है।